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मत बांटो इंसान को –कविता मंजरी- गीत - काव्यवाचन

यह कविता प्रसिद्ध कवि विनय महाजन द्वारा लिखित है जिसमें मानव मूल्यों की चर्चा की गई है और कहा गया है कि पारस्परिक समरसता की भावना से ही विश्व का कल्याण हो सकता है।

वह चिड़िया जो – रघुवीर सहाय – कविता मंजरी गीत

रघुवीर सहाय द्वारा रचित इस कविता में एक छोटी चिड़िया प्रकृति के प्रति अपने मन में उत्पन्न कोमल भावों को प्रस्तुत करती है। यह कार्यक्रम इस कविता की गीतात्मक प्रस्तुति है।

मुक्ति की आकांक्षा - सर्वेश्वरदयालसक्सेना – कविता मंजरी - गीत

यह कार्यक्रम सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी द्वारा रचित कविता मुक्ति की आकांक्षा का गीतात्मक प्रस्तुतिकरण है जिसमें कवि ने स्वतन्त्रता के मूल्यों को बताया है।

झांसी की रानी – सुभद्राकुमारी चौहान – कविता मंजरी - गीत

यह कार्यक्रम सुप्रसिद्ध वीरांगना स्वतंत्रता सेनानी झांसी की रानी के जीवनवृत्त को गीत के द्वारा प्रस्तुत करता है।

मज़दूर – रामधारी सिंह दिनकर – कविता मंजरी - गीत

यह कार्यक्रम रामधारी सिंह दिनकर जी द्वारा रचित कविता मजदूर का गीतात्मक प्रस्तुतिकरण है जिसमें एक मजदूर की व्यथा का वर्णन है।

दीवानों की हस्ती –कविता मंजरी

हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध कवि भगवती चरण वर्मा की इस कविता में विचारों की स्वतन्त्रता के अधिकार को महिमा मंडित किया गया है।

हिमालय – सोहनलाल द्विवेदी – कविता मंजरी - गीत

यह कविता हिमालय पर्वत की अडिगता से प्रेरणा लेते हुए कहती है कि हमें भी हिमालय की तरह दृढ , अडिग और अविचलित रहना चाहिए।

सारे जहाँ से अच्छा – मोहम्मद इकबाल – कविता मंजरी - गीत

यह सुप्रसिद्ध कविता हमारे देश की विशेषताओं का बयान करते हुए इसे सर्वश्रेष्ठ की संज्ञा देती है।

विप्लव गायन – बालकृष्ण शर्मा नवीन – कविता मंजरी - गीत

सुप्रसिद्ध कवि बालकृष्ण शर्मा नवीन द्वारा रचित यह कविता संगीतात्मक रुप में प्रस्तुत की गई है जो स्वतन्त्रता के मूल्यों पर आधारित है।

मै सबसे छोटी होऊँ सुमित्रानंदन पंत - कवितामंजरी - गीत

सुमित्रानन्दन पंत द्वारा रचित इस कविता में एक बालिका के मन की सुखद अभिलाषा प्रगट की गई है कि वह अपने घर में सबसे छोटी रहे ताकि उसे अपनी माता का भरपूर प्यार प्राप्त होता रहे।

पहला पानी – केदारनाथ अग्रवाल- कविता मंजरी - गीत

यह कविता वर्षा ऋतु के आगमन के समय मानव के मन में उत्पन्न होने वाले हर्षोल्लास का बयान करती है।

बसन्ती हवा – कविता मंजरीगीत

हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध कवि केदारनाथ अग्रवाल की इस कविता में बसन्त की ऋतु में प्रवाहित होती अलमस्त हवा की चंचलता का वर्णन किया गया है।