22-Oct-2017
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अध्यापक नवाचार पुरस्कार

विद्यालयों एवं अध्यापक शिक्षा संस्थावनों हेतु शिक्षा में नवाचारी पद्धतियों और प्रयोगों पर अखिल भारतीय प्रतियोगिता
प्रस्तावना
विद्यालय और अध्यापक शिक्षा में नवाचारी पद्धतियाँ नामक योजना : विद्यालयी अध्याअपकों और अध्यापक शिक्षा हेतु एन.सी.ई.आर.टी. पुरस्कापर के लिए अखिल भारतीय प्रतियोगिता का प्रतिपादन उन्नीस सौ साठ के दशक के दौरान हुआ और यह 2005 तक प्रचलन में थी।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005 में, अध्याषय 5 के ”व्यपवस्थाऔगत सुधार” नामक ”नवाचारों को बढ़ावा” शीर्षक के अन्तार्गत निम्नदलिखित प्रेक्षण किए गए हैं :
शिक्षक बहुधा विद्यार्थियों को उनकी कक्षा में पाठ्यचर्या का ज्ञान कराने के लिए विशेष कक्षागत संदर्भ में अध्या्पन के नए-नए तरीके अपनाते हैं। (इसमें वे बाधाएँ शामिल हैं जो स्थाान की कमी, विद्यार्थियों की बड़ी संख्या , शिक्षा उपकरणों का अभाव, विद्यार्थियों के वैविध्यथ और परीक्षा की बाध्याता आदि को लेकर हो सकती हैं) ये प्रयास, व्यांवहारिक होने के साथ-साथ कई बार बढिया और रचनात्मयक हो सकते हैं, लेकिन उनका शिक्षक समुदाय और स्कूंल को पता भी नहीं होता और अक्सतर शिक्षक स्वंयं भी उसे कोई खास महत्वक नहीं देते हैं। वे शिक्षण के अनुभव बाँट सकते हैं और इस प्रकार शिक्षा के विविध अनुभवों को एक-दूसरे से साझा कर सकते हैं। इससे स्कूभलों के भीतर ही एक शैक्षिक वार्तालाप के अवसर मिलेंगे और शिक्षक एक दूसरे से अन्त :क्रिया कर सकेंगे और सीख सकेंगे। इससे नए विचारों, प्रयोग और नवोन्मेतष को मौका मिलेगा। किस प्रकार शिक्षा और अध्यशयन के नए रचनात्मिक तरीकों को अपनाया जाए कि वे व्य वस्था। का अंग बन सकें? आरंभ में स्कूाल में और समुदाय तथा ब्लॉ्क स्त र पर संरचनात्मकक स्थारन दिया जा सकता है, शिक्षकों को कक्षा के अनुभव को साझा करने के लिए प्रोत्सामहित किया जा सकता है। अगर अच्छा लगे तो इनमें से कुछ विचारों और गतिविधियों पर व्यपवस्थित रूप से आगे काम भी किया जा सकता है। यह भी आवश्य क है कि स्कूवल के अंदर और बाहर स्कूरली शिक्षकों के समूहों को साथ लाया जाए और उन्हेंआ संसाधन और साथ काम करने का समय मुहैया कराया जाए। यह भी आवश्याक होगा कि ‘अच्छीन’ समझी जाने वाली विधियों का दस्ता्वेजीकरण किया जाए और उससे संबंधित शोध को बढ़ावा दिया जाए।

क्षेत्र विनिमय, एनसीएफ-2005 की विशेषज्ञ समूह बैठकें और प्रेक्षणों के साथ पुरानी नीति की समीक्षा की गई। शिक्षकों, मुख्याएध्या पकों और विशेषज्ञों से प्राप्ते प्रतिपुष्टि के आधार पर विद्यालयी शिक्षा और शिक्षक शिक्षा की प्रणाली में एक लम्बेक समय के लिए व्येवस्था में नवाचारों और नवाचारी विचारों को बनाए रखने की दिशा में निम्न लिखित बाधाओं की पहचान की गई।

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