12-Dec-2017
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राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा

राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एन.सी.ई.आर.टी.) की स्था्पना भारत सरकार द्वारा वर्ष 1961 में देश में विद्यालयी शिक्षा में गुणात्मकक सुधार लाने की दृष्टि से की गई। स्था पना के बाद शीघ्र ही परिषद् ने इस दिशा में बहुत से कार्यक्रम तैयार किए। ऐसा ही एक कार्यक्रम प्रतिभावन विद्यार्थियों की पहचान एवं उन्हेंह प्रोत्साहित करना था। वर्ष 1963 में इस कार्यक्रम को राष्ट्री य विज्ञान प्रतिभा खोज योजना (एन.एस.टी.एस.एस.) नामक योजना के रूप में प्रतिपादित किया गया जिसमें प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान और उन्हेंव छात्रवृत्तियों द्वारा पुरस्कृरत करने का प्रावधान था। इस योजना के कार्यान्ववयन के प्रथम वर्ष के दौरान, यह दिल्ली के संघ राज्य – क्षेत्र तक ही सीमित था जिसमें कक्षा XI के विद्यार्थियों को केवल 10 छात्रवृतियाँ प्रदान की जाती थीं।

वर्ष 1964 में इस योजना को कक्षा XI के विद्यार्थियों हेतु 350 छात्रवृत्तियाँ देश के सभी राज्योंल और संघ राज्य। – क्षेत्रों में विस्ता्रित कर दी गई। ये छात्रवृत्तियाँ लिखित परीक्षा, परियोजना रिपोर्ट और साक्षात्कावर के आधार पर प्रदान की जाती थीं। लिखित परीक्षा में विज्ञान अभिरूचि परीक्षा और निर्दिष्टं वैज्ञानिक विषय वस्तुप पर एक निबन्ध शामिल था। अभ्यर्थियों को परियोजना रिपोर्ट लिखित परीक्षा के समय प्रस्तुत करनी होती थी। इन तीन घटकों के आधार पर चयनित अभ्य्र्थियों की अनुबद्ध संख्या् को तत्प श्चासत् वैयक्तिक साक्षात्कार देना होता था। इन चार घटकों में अभ्यार्थियों के प्रदर्शन को अन्तत: छात्रवृत्ति प्रदान करने के प्रयोजन हेतु नियुक्ता किया जाता था। ये छात्रवृत्तियाँ शोधअध्ये्ता तक केवल मौलिक विज्ञान में शिक्षा प्राप्तु करने के लिए प्रदान की जाती थीं।

शिक्षा की 10+2+3 प्रणाली के प्रारंभ होने के पश्चा त् वर्ष 1976 में एन.एस.टी.एस. योजना में भी परिवर्तन हुआ। अब यह केवल मौलिक विज्ञान तक ही सीमित नहीं था बल्कि सामाजिक विज्ञान, अभियांत्रिकी और आयुर्विज्ञान तक विस्ताारित हो चुका था। इसको राष्ट्री य प्रतिभा खोज योजना (एन.टी.एस.एस.) के रूप में पुनर्नामित किया गया। चूंकि देश में शिक्षा प्रणाली एक परिवर्तन के दौर से गुजर रही थी, इस योजना को कक्षा X, XI और XII के विद्यार्थियों के लिए खोल दिया गया और प्रत्येेक कक्षा के लिए पृथक-पृथक परीक्षाएं संचालित की गईं। छात्रवृत्तियों की संख्याा को 500 तक बढ़ा दिया गया। चयन प्रक्रिया में भी परिवर्तन किया गया। अब अभ्यईर्थियों को दो वस्तुखनिष्ठक प्रकार की लिखित परीक्षाओं नामत: मानसिक योग्य्ता परीक्षा (एम.ए.टी.) और शैक्षिक अभिवृत्ति परीक्षा (एस.ए.टी.) देनी होती थीं। इन दो परीक्षाओं के अर्हक अभ्य‍र्थियों की अनुबद्ध संख्या को आमने-सामने साक्षात्कासर के लिए उपस्थित होना होता था। एम.ए.टी., एस.ए.टी. और साक्षात्कार में प्राप्तष किए गए सम्मिलित प्राप्तांकों के आधार पर अंतिम पुरस्का र दिए जाते थे।

वर्ष 1981 में छात्रवृत्तियों की संख्याा पुन: 500 से बढ़ाकर 550 कर दी गई। ये 50 छात्रवृत्तियाँ केवल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्य र्थियों के लिए थीं। वर्ष 1983 में छात्रवृत्तियों की संख्याी पुन: बढ़ाकर 750 कर दी गई जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्य9र्थियों के लिए 70 छात्रवृत्तियों का विशेष प्रावधान था। यह व्यवस्था तब तक चलती रही जब तक वर्ष 1985 में इस योजना का विकेन्द्रीकरण नहीं कर दिया गया। वर्ष 2000 में छात्रवृत्तियों की संख्याव को 750 से बढ़ाकर 1000 कर दिया गया जिसमें अनु.जा.और अनु.ज.जाति. के अभ्यकर्थियों के लिए राष्‍ट्रीय मानकों के आधार पर क्रमश: 15 प्रतिशत एवं 7.5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।

इस योजना में एक और परिवर्तन वर्ष 2006 में किया गया जहाँ एन.टी.एस. परीक्षा कक्षा VIII के अन्तर में आयोजित की जाती थी। वर्ष 2008 की परीक्षा से शारीरिक रूप से विकलांग विद्यार्थियों के लिए 3 प्रतिशत के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
एन.सी.ई.आर.टी. की कार्यकारिणी समिति की दिनांक 25.11.2010 को आयोजित 94वीं बैठक में इस योजना के संबंध में चर्चा हुई और यह निर्णय लिया गया कि वर्ष 2012 से एनटीएसई को कक्षा X के विद्यार्थियों के लिए पुन: आयोजित किया जाएगा।

वर्ष 2012-13 से

    • एनटीएसई को कक्षा X विद्यार्थियों के लिए संचालित किया जाएगा।
    • इस परीक्षा में मानसिक योग्यगता परीक्षा (एमएटी) और शैक्षिक योग्य ता परीक्षा (एसएटी) शामिल होगी।
  • कक्षा IX और X में विद्यार्थियों को नामांकन के आधार पर राज्यन/संघ राज्य – क्षेत्र हेतु कोटे का अनुपातिक परिकलन किया जाएगा।
  • कक्षा XI से आगे (कक्षा/पाठ्यक्रम के निरपेक्ष) पढ़ रहे सभी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की राशि रु.500/- प्रतिमाह होगी, पीएच.डी. को छोड़कर, जहाँ यह यूजीसी प्रतिमानकों के अनुसार प्रदान की जाती है।

वर्तमान योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति अभ्य र्थियों को विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान में डॉक्टोारल स्त़र तक के पाठ्यक्रम एवं संव्यारवसायिक पाठ्यक्रमों में द्वितीय डिग्री स्तकर तक आयुर्विज्ञान और अभियांत्रिकी की पढ़ाई करने के लिए प्रदान की जाती है बशर्ते कि इस विवरणिका में दी गई शर्तों को पूरा किया जाए।

इस योजना से संबंधित अधिक विवरण उत्त रवर्ती पृष्ठों में दिया गया है।अन्य विवरण